एम्स को दान में मिले दिलों से अब तक 1000 लोगों को मिली जिंदगी

एम्स को दान में मिले दिलों से अब तक 1000 लोगों को मिली जिंदगी

 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों ने दान में मिले दिल की मदद से हाल ही में पांच साल के एक बच्चे के वॉल्व की मरम्मत कर उसे नई जिंदगी दी. एम्स के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्क्युलर डिपार्टमेंट (सीटीवीएस) ने होमोग्राफ्ट वॉल्व के जरिये जन्म के समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे जिस बच्चे की जान बचाई है वह इस तरह का 1000वां मरीज है. सीटीवीएस के प्रमुख डॉ. शिव चौधरी ने बताया कि होमोग्राफ्ट टिश्यू (ऊतक) का एक शरीर से निकालकर दूसरे शरीर में प्रत्यारोपण किया जाता है.दिल की सर्जरी में होमोग्राफ्ट की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने बताया कि होमोग्राफ्ट वॉल्व व टिश्यू (ऊतक) को सड़क हादसे में मारे गए लोगों के शवों से उनके परिजनों की सहमति के बाद लिया जाता है. उन्होंने बताया कि अब तक एम्स को 723 लोगों के परिजनों ने दिल दान किए जिनसे 1564 वॉल्व और अन्य टिश्यू सुरक्षित किये गये. चौधरी ने बताया कि यह दो तरह के मरीजों में बेहद उपयोगी है.