मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर संशय

मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर संशय

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सारी रणनीतियां लगभग उतर चुकी हैं, महज 15 महीने में ही मुख्यमंत्री कमलनाथ को पद से इस्तीफा देना पड़ा है. 22 कांग्रेसी विधायकों की बगावत के बाद कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस्तीफा देते वक्त उनकी सरकार की उपलब्धियों और बीजेपी पर साजिश से सरकार गिराने का आरोप लगाया.लेकिन इस्तीफे के पहले तक के कमलनाथ के कॉन्फिडेंस पर करारा झटका लगा. कांग्रेस के विधायकों कांग्रेस के नेताओं को बड़ी उम्मीद थी कि कमलनाथ अपने मैनेजमेंट के बूते सरकार को नहीं गिरने देंगे लेकिन परिस्थितियां ऐसी निर्मित हुई कि कमलनाथ के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार सत्ता से बेदखल हो ग.ई बीजेपी ने बाकायदा ज्योतिरादित्य सिंधिया को साध कर उनके खेमे के 16 विधायक और छह मंत्रियों को अपने पाले में कर लिया. बीते दिनों दिल्ली में बागी विधायकों ने जेपी नड्डा और नरेंद्र सिंह तोमर की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली. इधर भोपाल में प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मोर्चा संभाले हुए हैं, लेकिन अब कहीं ना कहीं सियासी गलियारों में एक चर्चा जोरों पर है और वह चर्चा है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा हालांकि अभी तक अगर सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाए तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही बनेंगे लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां हैं जिसके कारण कुछ अन्य नामों पर भी विचार किया जा रहा है. जातिगत समीकरण- हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने जब प्रदेश अध्यक्ष का चयन किया था और चंबल से आने वाले बीडी शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी थी तब एक बात स्पष्ट हो गई थी कि बीजेपी के लिए जातिगत पैरामीटर उतना मायने नहीं रखता लेकिन आगे आने वाले समय में उपचुनाव और फिर उसके बाद बहुत लंबा समय नहीं है तमाम चुनावों में, इसलिए इस बात की चर्चा भी जोरों पर है कि अगर ब्राह्मण को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है तो ओबीसी को साधने के लिए सीएम किसी बड़े ओबीसी चेहरे को बनाया जाए. एसटी एससी वर्ग को साधने के लिए थावरचंद गहलोत के नाम की भी चर्चा है साथ ही ओबीसी चेहरे के रूप में एक नाम दबी जुबान से चर्चा में है और वह नाम है केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का. उपचुनाव के चक्कर में चम्बल से सीएम- कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले 22 विधायकों में ज्यादातर चंबल से आते हैं और साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा के माध्यम से केंद्रीय मंत्री बनाना है. ऐसे में नरेंद्र सिंह तोमर का नाम भी चर्चा में है ऐसा कहा जाता है कि शीर्ष नेतृत्व नरेंद्र सिंह तोमर को प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमान सौंप सकता है .इससे उपचुनावों में भी सीधा असर पड़ेगा और साथ ही प्रदेश की कमान नरेंद्र सिंह तोमर को देने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को केंद्र में मंत्री भी बनाया जा सकता है. कुछ और नामों की चर्चा- प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए कुछ अन्य नामों की भी चर्चा समय-समय पर होती रही है, जिसमें नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव और राजेंद्र शुक्ल जैसे नाम हैं. विन्ध्य में बीजेपी का परफॉर्मेंस बहुत अच्छा रहा है ऐसे में राजेंद्र शुक्ल के नाम की चर्चा लाजमी लेकिन फिलहाल मध्यप्रदेश बीजेपी में प्रदेश अध्यक्ष पर ब्राह्मण चेहरे के होने के कारण ऐसा लगता है की पार्टी ओबीसी, एसटी एससी वोट बैंक को साधने के लिए कुछ अन्य नामों पर विचार कर सकती है. आदिवासी सीट भी टारगेट में-थावर चंद गहलोत का नाम इसलिए भी चर्चा में आया क्युकी संघ की रिपोर्ट के अनुसार और बीते विधानसभा के परिणाम में एसटी एससी कांग्रेस के पक्ष में था जिसके कारण सरकार बनी.बीजेपी का संगठन आगामी समय के निकाय,पंचायत,विधानसभा और अगले लोकसभा के बड़े प्लान के साथ काम कर रही है और प्रदेश में लम्बे समय के एससी एसटी नेतृत्व की मांग उठती रही है इस वजह से भी थावर चंद गहलोत के नाम की चर्चा हो रही है. जब तक विधायक दल की बैठक नहीं हो जाती हो और चेहरा नहीं चुन लिया जाता तब तक ऐसे कयास लगते रहेंगे. लेकिन एक बात साफ है कि मध्यप्रदेश में सरकार ना रहने के बाद भी जितने सक्रिय होकर शिवराज सिंह चौहान ने काम किया है वह सबके सामने है .ऐसे में उनके नाम को किनारे नहीं किया जा सकता अब देखना होगा कि शीर्ष नेतृत्व किसके नाम पर सहमत होता है और तमाम क्षेत्रीय जातिगत समीकरण संतुलन को बनाते हुए किसके नाम का ऐलान करता है. लेकिन ज्यादा संभावनाएं शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाए जाने की ही है.