23/09/2019 10:26:02 AM
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बड़े पर्दे पर जशपुर

बड़े पर्दे पर जशपुर

जिले में एक से बढ़कर एक प्राकृतिक सुंदरता वाले स्थान हैं। जिन्हें जितनी ख्याति मिलनी थी, वह अभी तक नहीं मिल पाई है। 


पर यहां बन रही फीचर फिल्म यहां की प्राकृतिक सुंदरता और फिल्मों के लिए बेहतरीन लोकेशन को विश्व के नक्शे में ला सकती है। यह बातें सोमवार को निर्देशक डॉ. दानिश इकबाल ने कहीं। वे जिला ग्रंथालय में अपनी पूरी टीम के साथ पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। शूटिंग के लिए जशपुर को ही चुनने के बारे में उन्होंने कहा कि फिल्म की स्क्रिप्ट ग्रामीण परिवेश पर ही आधारित है। उनकी टीम में जशपुर के ही युवा निर्देशक प्रितेश पांडेय हैं। उन्होंने जशपुर की कुछ फोटो भेजी। जिसके बाद उनकी टीम ने यहां आकर निरीक्षण किया। डॉ. दानिश ने बताया कि उनकी टीम यहां आकर और यहां की सुंदरता को देखकर भौंचक रह गई। उनके दिमाग में फिल्म के लिए जो लोकेशन थे, उससे कहीं बेहतर लोकेशन यहां मिले। डॉ. दानिश ने कहा कि इस फिल्म का जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ाव दिखता है। जिसमे जशपुरिया लोक को भी देखा जा सकता है। जिसमे जशपुर के विभिन्न पर्यटन स्थलों दमेरा, रानीदाह, देशदेखा, कोमड़ो डेम, घोलेंग चर्च, स्थानीय बाजार आदि स्थानों को चुना गया है। कहीं न कही यह फिल्म जशपुर की प्राकृतिक संपदा, धरोहर व बुनियादी ढांचो को समेटती नजर आती है। इसमें दिल्ली, मुंबई के कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। स्थानीय कलाकारों में मुख्य रूप से बाल कलाकार राजवर्धन सिंह, गायत्री, कैसर हुसैन, अमित पांडेय आदि को देख सकते हैं। 
यहां फिल्म सिटी व प्रोडक्शन हाउस हो सकता है डवलप 

फिल्म के निर्देशक डॉ. दानिश व उनकी टीम के सदस्यों ने कहा कि वे यहां के पर्यटन स्थलों को देकर इतने अभिभूत हुए कि कई बार जहां फिल्म में कम समय का सीन था, उसे बढ़ा दिया गया। उन्होंने कहा कि यहां के पर्यटन स्थल अब तक सुविधाओं की दृष्टि से उपेक्षित हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस फिल्म के माध्यम से जशपुर को पहचान मिली और कई फिल्माें की शूटिंग हुई, तो यहां फिल्म सिटी व प्रोडक्शन हाउस भी डवलप हो सकता है। 

फिल्म: मां-बच्चे की मार्मिक संवेदना पर 

यह फिल्म एक मां और बच्चे की मार्मिक संवेदनाओं पर आधारित है। फिल्म में बच्चा जन्म के बाद ही मां से दूर हो जाता है। साधो जो कि बच्चे के माँ बाप की तलाश में इधर-उधर भटक रहा होता है। उस दौरान उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह फिल्म विभिन्न मार्मिक पहलुओं को जोड़ते हुए बच्चे आैर साधो के इर्द-गिर्द घूमती है। 

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