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कैसे बनी अवार्ड विंनिंग शार्ट फ़िल्म मिरर

कैसे बनी अवार्ड विंनिंग शार्ट फ़िल्म मिरर

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार तथा नेशनल फिल्म डेवलपमेन्ट कोर्पोरेशन द्वारा आयोजित स्वच्छ भारत शार्ट फिल्म फेस्ट (दिल्ली) के लिए छत्तीसगढ़ के अमीर हाशमी को सूचना एवं प्रसार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्वच्छ भारत विषय पर निर्मित शार्ट फ़िल्म “मिरर” के लिए अवार्ड दिया गया है, श्रेष्ठता का प्रमाणपत्र पाकर खुद को सम्मानित महसूस कर रहा हूँ।  सिर्फ एक 5 मिनट की शार्ट फिल्म के लिये तकरीबन साल भर इसका स्क्रीनप्ले लिखा और 4-5 महीनों तक फिल्म के लिए यहां-वहां प्रोड्यूसर्स के यहां चक्कर लगाते रहा, किन्तु आख़िर में दोस्तों और साथियों की मदद से फंड एकत्र करके इसे बनाया और कामियाब हुआ।


फिल्म का डॉयरेक्शन और एक्टिंग मैंने की है, जिसमें मैंने एक पागल व्यक्ति का किरदार निभाया गया है, इस फिल्म की कहानी पंजाब के सरदार सुखी ने लिखी है जो पेशे से ओमान देश के मस्कत शहर में ड्राइवर था, आज कल चंडीगढ़ पंजाब में है, जिससे मेरी बात फेसबुक के ज़रिये हुयी थी और मैं उसकी कहानी में मन्द्र्मुग्ध हो गया और निश्चय किया की यह फिल्म ज़रूर बनाऊंगा, मैंने जब कहानी सुनी तो इसे फ़िल्म के रूप में बनाने के लिये दिन-रात एक कर दिया और तकरीबन साल भर फ़िल्म के स्क्रीनप्ले पर काम किया और इस  एक कहानी को स्क्रीन पर कैसे जादूई बनाया जाये जिससे ना सिर्फ यह फिल्म रोचक हो बल्कि आम लोगों के लिये भी प्रेरणा का श्रोत बने।
फिल्म में मेरी खुद एक्टिंग करने के पीछे भी एक रोचक कहानी है, जब शूटिंग का दिन आया सब कुछ फाईनल होने के बाद तो आखिरी दिन में फिल्म का लीड-एक्टर ही भाग खड़ा हुआ, जिसे मैं एक थियेटर में मिला था, उसने कहां की यह बड़ी हास्यप्रद कहानी है और पागल का किरदार मुझसे ना हो पायेगा क्यूंकि मेरी शहर में थोड़ी इज़्ज़त है, लोग मुझे देखेंगे ऐसे किरदार में मुझे भला बुरा कहने लगेंगे, यह कहकर वो थियेटर आर्टिस्ट अपने रास्ते चल पड़ा और मेरे फिल्म फिर थम गयी. मगर ऐसे हालात में फिल्म के लेखक सुखी और सिनिमेटोग्राफर एवन ने मुझे हिम्मत दिलायी और कहां की “कोई काम मर्ज़ी का हो तो अच्छा, ना हो तो और भी अच्छा, क्योंकि इसमें खुदा की मर्ज़ी होती है” और मुझे खुद इस फिल्म में एक्टिंग के लिए ज़ोर दिया तो मैंने हामी भरी और वो जूनून की मुझे फिल्म कैसे भी पूरी करके टाईम से पहले फेस्टिवल में भेजनी थी, सो मैंने इस काम को भी अंजाम दिया।

फिल्म के बीच में एक इमोशनल सीन है जब एक कूड़े के ढेर में से कुछ आवाज़ सुनकर मैं उसे तलाशने लगता हूँ, उस सीन को फ़िल्माने के बाद मुझे याद है की फिल्म के  18-20 लोगों की टीम और जो कुछ लोग जो वहाँ इकट्टठे हो गए तकरीबन 60-70 लोग रहें होंगे उनमें से लगभग लोगों की आँखे नम हो गयी थी और मैं खुद किरदार में इस कदर डूबा हुआ था की फ़िल्म के असोसिएट डायरेक्टर आकाश गोस्वामी ने मुझे हाथ पकड़ कर हिलाया और कहां अमीर भाई शूटिंग ख़त्म हुयी, किरदार से बाहर आ जाईये।
इस शॉर्ट फिल्म का म्यूज़िक लक्ष्मीकांत गजेंद्र (रवि साउंड) ने दिया है जिनका कोइ जोड़ नहीं है, फ़िल्म के भावभीन डायलॉग से लेकर साउण्ड मिक्सिंग की रिकार्डिंग तक में मुझे लक्ष्मीकांत जी का काम मुम्बई के टक्कर का लगता है।

फ़िल्म की कलर ग्रेडिंग का काम जर्मनी के मेरे मित्र मॉरिसियो ने किया है वह भी मेरे ऑनलाइन दोस्तों में से एक है और हमनें एडिंटिंग टेबल से ऑनलाईन ही इस फिल्म की कलर ग्रेडिंग का काम करवाया।
चूँकि फ़िल्म अभी साल भर में होने वाले और भी फेस्टिवल्स के लिए भेजी जाएगी इसलिए अभी इसका प्रदर्शन नहीं किया जा रहा है, कुछ महत्त्वपूण फेस्टिवल्स में और भाग लेने के बाद ही इसे बिक्री के लिए रखा जायेगा फिर चाहे इसे यशराज फिल्म खरीदे या सरकार, मेरा सपना केवल यह है कि आम लोगों तक भी इसके प्रदर्शन से लोगों में जागरूकता लायी जानी चाहिये और बस प्रधानमंत्री जी का स्वच्छ भारत का सपना पूरा होना चाहिए।

अमीर हाशमी 
98261-21177

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