18/07/2018 12:20:40 AM
BREAKING NEWS
Home » Home » सत्ता, सियासत और शराब:अमित मिश्रा
सत्ता, सियासत और शराब:अमित मिश्रा

सत्ता, सियासत और शराब:अमित मिश्रा

छत्तीसगढ़ में शराबबंदी को लेकर सियासी पारा बहुत तेज हो चुका है. एक ओर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी की पार्टी ने आगामी चुनाव में शराबबंदी को ही मुख्य मुद्दा मानकर अभी से वर्तमान सरकार का घेराव शुरू कर दिया है.

छत्तीसगढ़ के शराब  संग्राम में अजीत जोगी की पार्टी गठन के पहले से ही अजित जोगी के पुत्र और विधायक अमित जोगी सभाएं कर सरकार घेरते आये हैं . रमन सरकार का यह फैसला लेना कि शराब अब सरकार बेचेगी इससे जनाक्रोश बहुत तेजी से बढ़ा है सदन से सड़क तक की लड़ाई विपक्ष ने शुरू कर दी है, ग्रामीण स्तर पर, जिले स्तर पर और  राज्य स्तर पर बड़े प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं विपक्ष में खड़ी कांग्रेस और कांग्रेस से ही  टूट कर बनी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस सरकार के खिलाफ कम आपस में विरोध की संस्कृति को जनता के सामने लाकर शराब बंदी का विरोध कर रहे हैं,कई बार ऐसा लगता है की शराबबंदी पर कांग्रेस और जोगी कांग्रेस के बीच संग्राम चल रहा है. सरकार को बखूबी पता है अगर यह दोनों पक्ष(कांग्रेस और जनता कांग्रेस जोगी)  आपस में लड़ेंगे उसमें फायदा सत्ता को ही होगा. बिहार में शराबबंदी होने के बाद छत्तीसगढ़ में एक माहौल सा बना हुआ है .छत्तीसगढ़ में शराब का प्रचलन बहुत तेज है जगह-जगह शराब बिक्री , शराब के नशे में अपराध, बलात्कार की घटनाएं, छेड़छाड़, मारपीट यह आम बात हो चुकी है आज युवा नशे की गिरफ्त में है .Image result for chhattisgarh sharab

आसानी से उपलब्ध शराब वाले इस राज्य में सरकार शराबबंदी के पक्ष में नहीं है  क्योंकि उससे जुड़ा हुआ है एक बहुत बड़ा राजस्व. सरकार ने खुद शराब बेचने का फैसला इसलिए किया ताकि इस मुनाफे को और ज्यादा बढ़ाया जा सके. नयी नीति के साथ नई शराब दुकानें खोलने का ऐलान हुआ प्रशासन शराब दुकान खोलने के लिए लामबंद हुआ, लेकिन फिर कहते हैं कि पाप का घड़ा भरने के बाद आक्रोश का तूफान तेजी से उठा मोर्चा सम्हाला महिलाओं ने, जगह-जगह महिलाएं लाठी-डंडे उठाकर शराब दुकान खुलने के विरोध में मोर्चा संभाला और विरोध की एक नई संस्कृति का सृजन हुआ.

 

शराबबंदी के इस विरोध से एक नया पक्ष भी देखने को मिल रहा है या यूं कहें कि महसूस हो रहा है कहीं ऐसा तो नहीं कि  सरकार खुद  शराबबंदी के मुद्दे को केंद्र में रखकर अन्य मुद्दों से जनता का और विपक्ष का ध्यान भटकाना चाहती है, कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार शराबबंदी पर एक बहुत बड़ा आंदोलन देखना चाहती है या यूं कहें कि खुद आंदोलन खड़ा करना चाहती है ताकि इस आंदोलन की लपटें चुनाव के थोड़े दिन पहले तक पहुंचे और सरकार उस समय शराबबंदी कर सभी मुद्दों से ध्यान हटाते हुए जनता की वाहवाही लूट सके और शराब बंदी कर दे जिसके परिणाम स्वरुप चुनाव में जनसमर्थन मिल सके .

यह एक सोचने की बात है कि इतने व्यापक स्तर पर शराब बंदी का विरोध हो रहा है और सरकार चुप है जो इस ओर भी इंगित करता है कि अगर यह बहुत बड़ा चुनावी मुद्दा बन पाया तो सरकार शराबबंदी को लागू कर या उसमें कुछ कड़े संशोधन कर जनता के समक्ष रखेगी और जनता को यह लगेगा कि सरकार ने हमारी सुन ली अन्य सभी बड़े मुद्दे नक्सलवाद, बेरोजगारी, धान के समर्थन मूल्य का मूल्य का मुद्दा, यह सब भूल कर सिर्फ शराबबंदी के आधार पर एक बहुत बड़ा कदम मानकर सरकार को वोट करेगी और फिर से उस सरकार को चुनेगी. इस सियासत में सब कुछ संभव है हो सकता है 2018 के चुनाव में राजनैतिक सियासत शराब के रास्ते सत्ता तक पहुंचे.

विपक्ष कमजोर है क्योंकि एक विपक्ष के दो टुकड़े हुए हैं दोनों अलग-अलग बैठे हुए हैं प्रदेश सरकार यह चाहती होगी खंड-खंड में बिखरी हुई कांग्रेस और उनसे समेटकर बनी एक जनता कांग्रेस जोगी यह आपस में लड़े जिसका फायदा भाजपा को होगा और वह फिर से एक बार 2018 में विपक्ष को मूल मुद्दों से भटका कर किसी एक मुद्दे पर लाकर खड़ा करेंगे और उसी मुद्दे पर वह चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे भी.

    अमित मिश्रा 

About Amit Mishra

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*