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राजस्थान की मुख्यमंत्री सोने-के-अंडे देने वाली मुर्ग़ी बन चुकी है?

राजस्थान की मुख्यमंत्री सोने-के-अंडे देने वाली मुर्ग़ी बन चुकी है?

केंद्रीय अनुशासन समिति के सवाल और बीजेपी के नेता घनश्याम तिवाड़ी द्वारा उनके ‘माकूल’ जवाबों के बीच भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रदेश में आने वाला समय कैसा होगा, इसको लेकर चर्चा जोरों पर है। पार्टी के वरिष्ठ विधायक तिवाड़ी ने नोटिस के जवाब में जो बड़ा पत्र लिखा है, वह न केवल पार्टी का इतिहास बयां कर रहा है, वरन साथ ही जनता के मन में बार—बार उठने वाले कई सवालों के जवाब भी दे रहा है।

करीब डेढ साल बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। चुनाव को लेकर कांग्रेस और बीजपी, दोनों ने अपने घोड़े दौड़ाने शुरू भी कर दिए हैं। लेकिन जो सबसे खास है, वह है तिवाड़ी के नोटिस के बाद पार्टी का रूख। चूंकि इस रूख पर राज्य में बीजेपी का भविष्य टिका। लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति के भीष्मपितामह रहे पूर्व राष्ट्रपति और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भैंरूसिंह शेखावत के साथ रहे तिवाड़ी ने अब अपनी चाणक्य नीति शुरू कर दी है।

अपने पत्र में दिए गए जवाबों का पुलिंदा (जिसमें 6 पेज पहले और 8 पेज गुरूवार को भेजे हैं) पार्टी द्वारा निर्णय लेने के लिए सोचनीय हो सकता है। साथ ही साथ प्रदेश व दिल्ली में समान विचारधारा वाले पार्टी नेताओं को एकजुट करने के लिए यह पत्र नई जान फूंकेगा। ऐसा नहीं है कि राजस्थान और केंद्र में सभी नेता सीएम राजे के पक्ष में हैं। कुछ लोग उनसे खुश भी नहीं हैं। ऐसे में उन लोगों के लिए तिवाड़ी का यह जवाबी पत्र संजीवीनी का काम करेगा। खासकर आज जब वे सत्ता के आगे कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं।

खैर! तिवाड़ी ने एक वाक्य लिखा है ‘(आप तो समझते है हैं कि इनका यह “मैनजमेंट” किस प्रकार का है)’। यह पंक्ति अपने आप में भ्रष्टाचार और दुराचार को इंगित करने के लिए बड़ा सबूत है। तिवाड़ी ने साफ नहीं लिखकर इस बात की ओर इशारा कर दिया है कि कहीं न कहीं पार्टी में अंदरूनी भ्रष्टाचार है, उससे में मुख्यमंत्री राजे लिप्त हैं, जो काफी पुराना भी हो सकता है।

तिवाड़ी के द्वारा लिखे गए पत्र के बीच में एक लाइन (‘केंद्रीय स्तर पर आगामी चुनावों को ध्यान में रख कर आपको जो भी निर्णय लेना हो सोच समझकर लेना।’), भी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है, जबकि पार्टी को उनके नोटिस के जवाब के बाद कोई निर्णय लेना है। इस एक पंक्ति में तिवाड़ी ने जहां अपनी जन्मदात्री पार्टी को सुझाव दिया है, वहीं उनके खिलाफ उठाए जाने वाले संभावित कदम के बाद प्रदेश की सियासी समीकरण को साफ कर दिया है।

सबसे ज्यादा सोचने वाली बात और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर भ्रष्टाचार का तीखा प्रहार सोने के अंडे देने वाली मुर्गी ( ‘वे कौन लोग हैं जिनके लिए राजस्थान की मुख्यमंत्री सोने-के-अंडे देने वाली मुर्ग़ी बन चुकी है?’) है। इस तरह की एक पंक्ति जहां सीएम राजे और तिवाड़ी के बीच बढ़ी कटुता को प्रदर्शित करती है, वहीं सीएम राजे पर तिवाड़ी द्वारा पहली बार भ्रष्टाचार के आरोप का सीधा हमला है। जिसमें आलाकमान स्तर के लोगों को भी शामिल किया गया है।

तिवाड़ी के जवाबी लेटर में बीजेपी के द्वारा राजस्थान के भविष्य के निर्णय को लेकर जो सुझाव दिया गया है, वह भी पार्टी के लिए काफी मनन का विषय है। तिवाड़ी ने साफ लिखा है कि ‘राजस्थान की जनता ये सब अपनी आँखों से देख रही है, महसूस कर रही है। समय पर जनता फ़ैसला भी सुनाएगी, यक़ीनन ये बात दूर तलक जाएगी।’। मतलब साफ है कि आगामी विधानसभा चुनाव में यदि सीएम राजे को चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा गया तो चुनाव परिणाम में पार्टी की स्थिति खराब हो सकती है।

पूरे पत्र में एक स्पष्ट है, वो ये है कि यदि पार्टी तिवाड़ी पर कार्यवाही करती है तो आने वाले दिनों में प्रदेश बीजेपी, राज्य सरकार और पार्टी पर उनके हमले तेज होंगे। इन हमलों में जहां इतिहास को खोजा—खंगाला जाएगा। तिवाड़ी ने जवाब देने के साथ ही अगले दिन (आज) ही दीनदयाल वाहिनी की प्रदेश कार्यकारिणी की मिटिंग बुलाई है। तिवाड़ी की आगे की रणनीति क्या होगी यह बता पाना मुश्किल है, लेकिन इससे उन्हीं के शब्दों की वह पंक्ति झलकती है कि ‘समीकरण तैयार हैं, पार्टी समझे तो ठीक नहीं तो ‘महायज्ञ’ होगा!’

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