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​अफवाहों के बीच कहीं विदाई न हो जाए:अमित मिश्रा

​अफवाहों के बीच कहीं विदाई न हो जाए:अमित मिश्रा

पिछले कुछ महीनों से मध्य प्रदेश कांग्रेस में एक बड़ी अफवाह का दौर शुरू हुआ है और वह अफवाह है प्रदेश के दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री छिंदवाड़ा  से सांसद कमलनाथ के बीजेपी में शामिल होने की अफवाह.
इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि कमलनाथ की इच्छा अब मध्यप्रदेश की राजनीति करने की है लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की गुटबाजी 3 या 4 मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों के बीच कमलनाथ फ़स चुके हैं. चर्चाओं का दौर पिछले साल से शुरू है कभी प्रदेश अध्यक्ष बनाने का, कभी मुख्यमंत्री चेहरा बनाने का, कभी प्रदेश की फंडिंग का मामला इस बीच कांग्रेस सिर्फ बैठक कर कर रही है किसी फैसले तक नहीं पहुंच पाई है. विधानसभा चुनाव 2013 में करारी हार के बाद से परिवर्तन की लहर आए दिन एक नया मोड़ लेती है, बड़े दिग्गज नेता बस दिल्ली की ओर निहारते रहते हैं और प्रदेश में व्याप्त सभी गुट के नेता अपने नाम की घोषणा की उम्मीद लिए सिर्फ दिल्ली का चक्कर काटने में लगे हैं.

प्रदेश के नेताओं से बातचीत करने पर ऐसा लगता है कि मतभेद नहीं मनभेद भी बड़े व्यापक स्तर पर है और इस गुटबाजी में पिसता है एक आम कार्यकर्ता जो शायद राजीव गांधी से जुड़ा हुआ है जिसकी विचारधारा इंदिरा गांधी के बताए रास्तों से है.

230 सीट विधानसभा वाले मध्यप्रदेश में जीत का परचम लहराने के लिए बड़ी व्यापक स्तर पर धन की जरूरत पड़ेगी और यह बात प्रदेश स्तर से लेकर केंद्रीय नेतृत्व को भी पता है कि वर्तमान स्थिति में कमलनाथ के अलावा कोई आर्थिक रुप से चुनाव को मैनेज नहीं कर सकता.

शीर्ष नेतृत्व फायर ब्रांड ज्योतिरादित्य सिंधिया को  मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करना चाहता है लेकिन जब इलेक्शन मैनेजमेंट की बात आती है तो कमलनाथ को कहा जाता है कि आप मैनेज करिए अब कौन समझाए कि यह 1960 के दशक की राजनीति नहीं है जहां निस्वार्थ भाव से पार्टी के प्रति समर्पित होकर एक कार्यकर्ता की हैसियत से कोई काम करेगा और बदले में उसे कुछ नहीं चाहिए आज परिस्थितियां साफ है अगर इलेक्शन मैनेजमेंट(फंडिंग) कमलनाथ करेंगे तो सीएम फेस भी वही होंगे नहीं तो फिर भाजपा में जाने की अफवाहें किसी दिन सही साबित हो सकती है और सिर्फ एक खबर पहुंचेगी कि BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष के हाथों भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस के कमल.

अमित मिश्रा


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