10/12/2018 4:02:30 AM
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पक्ष और विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन में उलझा किसान–अमित मिश्रा

पक्ष और विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन में उलझा किसान–अमित मिश्रा

देश भर में किसान उग्र हो चुके हैं, मप्र. में किसानों को सरेआम गोली मार दी गयी सत्ता पक्ष और विपक्ष किसानो के बहाने सियासत करने में लगे हैं. सरकार और विपक्ष अपने शीर्ष नेतृत्व के समक्ष शक्ति प्रदर्शन कर आंख दिखा रहे हैं अपनी ताकत का अहसास करवा रहे हैं और इन सब में पिस रहा गरीब किसान.

मध्यप्रदेश में शुरू किसान आन्दोलन अब राजनीति करने और शीर्ष नेतृत्व के समक्ष शक्ति प्रदर्शन करने का अड्डा बन चुका है.इसे सियासी दंगल कहें या एक किसान रूपी चूल्हे में पकती राजनैतिक रोटी. मध्यप्रदेश में किसानों का आंदोलन बढ़ता जा रहा है, प्रदेश के मंदसौर की घटना ने देशभर के केंद्र में मध्यप्रदेश को लाकर खड़ा कर दिया, सवाल सिर्फ एक था प्रदर्शन कर रहे किसानों पर गोलियां क्यों चलाई गई. 5 किसानों की मौत के बाद आन्दोलन उग्र हो चला और इस उग्र आन्दोलन में मूर्छित कांग्रेस को मानो संजीवनी मिल गई हो .दिल्ली से राहुल गांधी मंदसौर पहुंचे लेकिन मंदसौर में पहुंचने के पहले ही उन्हें रोक लिया गया. वो मृतक परिजनों से मिले किसानों ने अपने बीच कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को पाकर संतोष के भाव से अपनी समस्याएं बताई  .

इस बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उपवास पर बैठ गये और ऐलान कर दिया की सरकार अब दशहरा मैदान से चलेगी कैबिनेट मंत्री विधायक सब पंडाल के नीचे आकर उपवास को भाषणबाजी का अड्डा बना चुके थे अपने भाषणों में शिवराज के गुणगान सरकार की तारीफ करते नहीं थके थकेंगे भी क्यों वातानुकूलित पंडाल से जो भाषण दे रहे थे यह एक तरह से शिवराज और उनके खेमे के शक्ति प्रदर्शन जैसा ही था, कहीं न कहीं यह शक्ति प्रदर्शन था शीर्ष नेतृत्व को दिखाने के लिए .मीडिया द्वारा लगातार सरकार पर दवाब को देखते हुए सूबे के मुखिया प्रदेश में अपनी स्थिति और सरकार के विधायक मंत्रियों के साथ बैठ अपनी शक्ति का परीक्षण करना चाहते थे .  जनता को लगा यह उपवास कुछ बहुत दिनों तक चलेगा जब तक पूरे प्रदेश में स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, जब तक कोई समाधान नहीं निकल जाता, जबतक कोई बड़ा आश्वासन नही मिल जाता लेकिन अगले ही दिन चांदी के गिलास में नारियल का जूस पीकर मुख्यमंत्री ने लाखों खर्च करते हुए अनशन को समाप्त कर दिया और सत्ता शक्ति परीक्षण कर उठ गयी.

अब बारी थी विपक्ष के शक्ति परीक्षण की विपक्ष से कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सत्याग्रह के माध्यम से शक्ति परिक्षण की शुरुआत की है .किसान पुत्र सुभाष यादव के पुत्र मप्र. कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरुण यादव ने भी अपने संसदीय क्षेत्र में बड़ा किसान सम्मलेन और आन्दोलन करने का मन बना लिया है साथ ही साथ नेता प्रतिपक्ष के साथ वो प्रदेश भर में सरकार के खिलाफ आन्दोलन में शामिल हो रहे है .

सिंधिया के आन्दोलन के बाद बारी होगी कमलनाथ की उन्हें भी अपनी शक्ति प्रदर्शन करने का मौका दिया जायेगा. विपक्ष की ओर से यह सारी कवायत शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर प्रदेश की कमान लेना भी है .आगामी 2018 विधानसभा चुनाव की दृष्टि से किसान एक राजनीति करने का बड़ा केंद्र बन चुका है. शिवराज सिंह पर दवाब था इसलिए उन्होंने उपवास के सहारे शीर्ष नेतृत्व को बता दिया की अभी मेरी ही चलेगी.सत्ता पक्ष और विपक्ष के अन्दोलना अपनी जगह किसान अपनी जगह पिछले 2 दिन में 3 किसानो से आत्महत्या की है सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही है और किसानों की मौत ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र सरकार अपने 3 साल के कार्यकाल का जश्न मना रही है.किसानो पर केन्द्रित इन आन्दोलनों में किसान कहीं खो न जाये हमारा अन्नदाता आये दिन मौत को गले लगा रहा है सरकार खामोश है विपक्ष बिखरा हुआ है.

        अमित मिश्रा

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