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सोशल मीडिया , जुड़ाव कम बिखराव ज्यादा:दक्षम द्विवेदी

सोशल मीडिया , जुड़ाव कम बिखराव ज्यादा:दक्षम द्विवेदी

सोशल मीडिया ने जब भारत में दस्तक दी तो लोगों में जबरदस्त खुशी देखने को मिली और हो भी क्यों ना एक ऐसा मंच मिला जिस पर लोग अपनी खुशी अपने दुख साझा करने लगे . दूर देशों के लोगों से हमारा संपर्क होना लगा नए नए दोस्त बनने लगे .बहुत जल्द ही यह बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो गया जिसमें facebook सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ .इसके प्रारंभ का उद्देश्य लोगों का अकेलापन दूर करना तथा लोगों में सामंजस्य को स्थापित करना था . शुरू में हुआ भी ऐसा लोगों में इसमें अपना एकाउंट बनाने की होड़ लगी और आज यह दुनिया की सबसे ज्यादा लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट बनकर उभरी किन्तु वर्तमान में यह मंच एक वर्ग के दुसरे वर्ग को नीचा दिखाने पर तुला हुआ है जातीय वैमनस्य फैलाने का ज़रिया बनता जा रहा है .
धार्मिक उन्माद को बढ़ावा मिल रहा है जो कि एक स्वस्थ समाज के लिए घातक सिद्ध हो रहा है और उस घृणा का फायदा राजनीतिक दल भी बढ़ चढ़ उठाने से पीछे नहीं है. यकीन ना हो तो बस आप लोगों की पोस्ट पढ़िए बस खुद ही तस्वीर साफ हो जाएगी कि कैसे लोग जागरूकता के नाम पर लोगों के मन ,मस्तिष्क पर घृणा को स्थापित करते जा रहे जा रहे हैं ऐसे लोग इस बात से बेखबर हैं कि आपकी ऐसी पोस्टें हिंसा का वातावरण निर्मित कराने में सहयोगी साबित हो रहीं हैं . सोशल मीडिया का उद्देश्य लोगों को जोड़ना है तोड़ना नहीं, लोगों में आत्मीयता को बढ़ाना है ,घृणा का प्रसार नहीं किसी भी जाति , धर्म के बारे में कोई भी आपत्तिजनक बात लिखने से बचना चाहिए और ऐसी पोस्ट डालनी चाहिए कि लोगों में आपसी सामंजस्य स्थापित हो सके यही सोशल मीडिया का सही उपयोग होगा.क्योकिं घृणा फ़ैलाने वालों की तादात बहुत ज्यादा है हमें उस ताकत से लड़ना है जो घृणा फैला रही है .कहीं सामाजिक बनते बनते हम लोग असामाजिक कार्यों को अंजाम ना दे इस बात का ध्यान रखना चाहिए.
लेखक- दक्षम द्विवेदी
युवा लेखक, पत्रकार

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