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ऐसे अफसर होंगे तभी पढ़ेगा इंडिया, प्राइमरी स्कूल में कराया बेटी का एडमिशन

ऐसे अफसर होंगे तभी पढ़ेगा इंडिया, प्राइमरी स्कूल में कराया बेटी का एडमिशन

एक बड़ा अफसर और सफल व्यक्ति बनने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है। कितना परिश्रम, त्याग और शिक्षा लेनी होती है। यह बात बलरामपुर जिले के कलेक्टर बखूबी समझते हैं। बीते दो दिनों में उन्होंने जो कारनामे किये है वह शिक्षा की बदहाल व्यवस्था को सुधारने का प्रयास के लिए देशभर में मिसाल बन गया है।

सरकारी स्कूलों की बदहाली देशभर के कई राज्यों में देखी जा सकती है। एक गरीब के पास भी थोड़े पैसे आ जाए तो वो अपनी सन्तान को बेहतर व्यवस्था से लेस निजी स्कूल में पढ़ाने के ख्याब देखता है। कल ही उन्होंने अपनी बेटी का दाखिला सरकारी स्कूल में करवाया। लेकिन बलरामपुर के कलेक्टर अवनीश शरण ने ऐसा नही किया। अपनी नन्हीं बिटिया वेदिका को स्कूल भेजा तो वह थी बलरामपुर प्राथमिक शाला। वेदिका ने इसके पहले नर्सरी स्तर तक की पढ़ाई, आंगनबाड़ी केंद्र से की है। 


2009 बैच के आईएएस और मौजूदा समय में बलरामपुर कलेक्टर अवनीश शरण की सोच को हर कोई सलाम कर रहा है। सभी कहते हैं वाह भाई कमाल के कलेक्टर है। जाहिर है जब बच्चे विशिष्ट परिवार से आते हैं तो उसकी पालना जिसमें पढ़ाई शामिल है। वो भी विशिष्ट होती है। पर यह अवनीश की सरलता कहिए या बलरामपुर में शिक्षा को लेकर अपनी कवायदों पर भरोसा वह देश के अफसरों, नेता और मंत्रियों के लिए सबक के समान है जो सरकारी तन्त्र के अगुआ होकर अपने बच्चों को महंगे कान्वेंट स्कूलों में भेजते हैं। इस पूरे मामले में अवनीश कभी कोई टीका टिप्पणी नहीं करते, उन्होंने कहा मुझे नहीं लगता यह कोई ख़बर है मेरी बेटी का दूसरे बच्चों की तरह एडमिशन ही तो है।


बिगड़ी शिक्षा बर्दाश्त नहीं तो की बड़ी कार्रवाई
दसवीं, बारहवीं के रिजल्ट खराब होने पर बलरामपुर कलेक्टर अवनीश शरण ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कल शाम ही 42 प्राचार्यों को बदल दिया है। वहीं, दो ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों की छुट्टी कर दी। स्कूलों के परफारमेंस को लेकर राज्य की यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। जाहिर है, इस साल बलरामपुर के नतीजे बेहद खराब रहे। दसवीं में बलरामपुर जिला 24वें और बारहवीं में 21वें नम्बर पर रहा।

अवनीश ने उन प्राचार्यों को पद प्रभार से हटाया है। जिनके स्कूल में नतीजों का प्रतिशत तीस प्रतिशत से कम रहा है। उनकी वेतन वृद्धि रोक दी गई है। जबकि शेष ऐसे जिनके स्कूलों का परिणाम प्रतिशत पचास से कम रहा है। उन्हें केवल प्रभार से हटाया गया है। अवनीश शरण ने कहा है कि, शिक्षा गुणवत्ता सुधार के सतत प्रयास जारी है। पर यह कार्रवाई तब की गई जबकि पाया गया कि दसवीं और बारहवीं दोनों के परिणाम इन प्राचार्य के प्रभार वाले स्कूलों में निराशाजनक था। 

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