सरकार की गलत नीतियों का बच्चों पर दुष्प्रभाव, बच्चों में समाप्त होती प्रतिस्पर्धा की भावना - रामप्रकाश पांडेय

सरकार की गलत नीतियों का बच्चों पर दुष्प्रभाव, बच्चों में समाप्त होती प्रतिस्पर्धा की भावना - रामप्रकाश पांडेय

जशपुर- समाजसेवक अधिवक्ता रामप्रकाश पांडेय का बेहद जरूरी आलेख वो लिखते हैं..

कभी कभी सरकार की कुछ गलत नीतियों का बच्चों के मन मे गम्भीर दुष्प्रभाव पड़ता है । किंतु सरकारें उस विषय पर न तो नीति बनाने से पहले और न ही नीति बनाने के बाद ही समीक्षा करती हैं।वर्तमान समय मे सभी स्कूलों की पढ़ाई ऑन लाइन हो रही है ।और इस पढ़ाई के दौरान शिक्षकों की बच्चों और उनके अभिभावकों से एक शिकायत है की बच्चे ऑन लाइन क्लास ज्वाइन तो करते हैं लेकिन शिक्षकों के प्रश्नों का कोई उत्तर नही देते हैं ।इसका कारण क्या है ? उक्त सम्बन्ध में मुझे लगता है कि बच्चो की परीक्षाओं को लेकर किए गए सरकार की दोहरे निर्णय का दुष्प्रभाव है कि अब बच्चों के मन मे प्रतिस्पर्धा की भावना समाप्त हो रही है । क्योंकि भारत सरकार के सीबीएससी बोर्ड के द्वारा एक तरफ तो होम एक्जाम लिए गए किन्तु बोर्ड परीक्षाओं के छात्रों को जनरल प्रमोशन दे दिया गया ।भले सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया हो लेकिन सरकार की इस दोहरी नीति का दुष्प्रभाव बच्चो के मन मे क्या हुआ इसकी चिंता करने वाला कोई नहीं है ।किसी भी कार्य मे प्रगति के लिए प्रतिस्पर्धा होना जरूरी होता है चाहे वो पढ़ाई हो या खेल । मैदान में अगर ट्रेक पर दो बच्चे खड़े हैं उनमें से एक बच्चा दौड़ता है और दूसरे को यदि खड़े खड़े ही विजेता घोषित कर दिया जाएगा तो इसका बच्चे के मन पर क्या दुष्प्रभाव पड़ेगा इसकी चिंता किए बगैर ही वर्तमान शिक्षा सत्र में सरकारों ने आधे बच्चो से परीक्षाएँ ली और आधे बच्चो को जनरल प्रमोशन दे दिया गया ।जबकि जब सारे कार्य ऑन लाइन हो रहे थे तो आखिर बोर्ड की परीक्षाएं क्यों नही ली जा सकी ।इस विषय पर समीक्षा की आवश्यकता है और इसके क्या क्या दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं कभी उन पर भी विचार किया जाना चाहिए । किन्तु दुर्भाग्य है कि इस विषय पर न सरकार और न ही अभिभावक और न ही बच्चो ने ही कोई आपत्ति जताई । मुझे लगता है कि आने वाले समय मे इस सम्बंध में गम्भीरता पूर्वक विचार हो ताकि देश की आने वाली पीढ़ियों के मन मे प्रतिस्पर्धा की भावना बनी रहे ।ताकि वे अपने जीवन मे ऊंचाइयों को छू सकें।।।।