150 गोवंश को गहरी खाई में धकेल दिया गया

लगभग 50 गोवंश मर गए

150 गोवंश को गहरी खाई में धकेल दिया गया

मध्य प्रदेश सरकार गौवंश के लिए गौशाला बनाने की तमाम वादे करती हैं लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज गाय सड़कों पर है गोवंश के कारण किसानों का खेती करना दूभर हो गया है और कई बार ऐसा देखा गया की गोवंश को गहरी खाई में धकेला जा रहा है|मध्य प्रदेश की सियासत गाय को लेकर हमेशा बहुत एग्रेसिव रही है सरकार गोवंश की सुरक्षा के तमाम वादे करती है मध्यप्रदेश में जब 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी तो गौशाला में बनाने के दावे किए गए बाद में सरकार गिरने के बाद यह सारी चीजें ठंडे बस्ते में जाती हुई दिख रही है ।रीवा जिले के लाल गांव थाना अंतर्गत एक बेहद गंभीर मामला देखने को मिला है जहां पर लगभग 150 की संख्या में गोवंश को गहरी खाई में धकेल दिया गया स्थानीय लोगों को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने पुलिस से गुहार लगाई लेकिन सोचिए यह प्रशासनिक व्यवस्था इतनी लाचार है कि 28 तारीख से लेकर आज 8 तारीख तक कोई व्यवस्थित रेस्क्यू नहीं किया गया रेस्क्यू ऑपरेशन अब शुरू हुआ है लेकिन हालात यह हैं कि अब तक लगभग 50 की संख्या में गोवंश मर गए हैं।स्थानीय निवासियों ने पुलिस प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी लेकिन पहले इस पूरे घटनाक्रम को बहुत हल्के में लिया गया परिस्थितिया अब बहुत बिगड़ चुकी हैं जितनी खाई में गोवंश को खेला गया है वहां पर इसकी करने में भी प्रशासन को काफी मशक्कतो का सामना करना पड़ता है सरकारी दावों की पोल खोलती हुई घटना है गोवंश सड़कों पर मर रहा है सरकार इस दिशा में ध्यान नहीं दें रही।गोवंश की ऐसी दुर्दशा अब विंध्य क्षेत्र में आम बात हो गई रीवा जिले का यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी कई जगह से शिकायतें आई थी कि कुछ शरारती लोगों ने गोवंश को गहरी खाई में धकेल दिया है लेकिन उसके बाद भी प्रशासन नहीं चेता , प्रशासन ने गोवंश के लिए कोई व्यवस्था नहीं बनायीं ,गौशालाओं का निर्माण भी अब ठंडे बस्ते में दिख रहा है खुद रीवा सांसद कह चुके हैं कि गौशाला भले बन गई है लेकिन इनका संचालन नहीं हो पाएगा और उसके लिए जिम्मेदार आमजन को बताया , सरकारी तंत्र और सरकार की व्यवस्था किस तरह है गाय पर देश भर में जिस तरह-तरह के सियासी घटनाक्रम हुए पर आज गोवंश सड़क पर मरने को मजबूर है इस मामले में अब देखना होगा कि प्रशासन क्या कदम उठाता है फिलहाल रेस्क्यू चल रहा है कई गोवंश मर भी चुके हैं |